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Showing posts with the label Indian Culture

शुक्र है शिक्षक हूँ, कुछ और नही... बहुत ही खूबसूरत रचना...▌Teacher's Day Special

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  Sharing this beautiful piece of writing... "शुक्र है शिक्षक हूँ" नेता नहीं, एक्टर नहीं, रिश्वत खोर नहीं, शुक्र है शिक्षक हूँ , कुछ और नही... न मैं स्पाइसजेट में घूमने वाला गरीब हूँ,

मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा...|| Mile Sur Mera Tumhara...

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मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने ह मारा , सुर की नदियाँ हर दिशा से बहते सागर में मिलें ... बादलों का रूप ले कर बरसे हल्के हल्के

चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपावली का त्यौहार अमावस...

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चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपावली का त्यौहार अमावस की रात में मनाया जाता है और क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली मना नहीं सकता। यह एक मधुर कविता है कि चाँद किस प्रकार खुद को राम के हर कार्य से जोड़ लेता है और फिर राम से शिकायत करता है और राम भी उस की बात से सहमत हो कर उसे वरदान दे बैठते हैं आइये देखते हैं । ************************ जब चाँद का धीरज छूट गया । वह रघुनन्दन से रूठ गया । बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है । स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है । तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है । हमारी ही चांदनी में सिया को निहारा है । सीता के रूप को हम ही ने सँभारा है । चाँद के तुल्य उनका मुखड़ा निखारा है । जिस वक़्त याद में सीता की , तुम चुपके - चुपके रोते थे । उस वक़्त तुम्हारे संग में बस , हम ही जागते होते थे । संजीवनी लाऊंगा , लखन को बचाऊंगा ,. हनुमान ने तुम्हे कर तो दिया आश्वश्त मगर अपनी चांदनी बिखरा कर, मार्ग मैंने ही किया था प्रशस्त । तुमने हनुमान को गले से लगाया । मगर हमारा कहीं नाम भी न आया । ...

चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं...

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इस दिवाली, चलो दिल से दिल मिलाते हैं। खोये हुऐ दोस्तों को, फिर ढूंढ़ आते हैं। सदियों से, रिश्तों पे पड़ी, धूल की मोटी परतें हटाते हैं... चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं। मुरझाये चहेरों पर, रौनक ले आते हैं। हर और बस, मुस्कुराहटें फैलाते हैं। दिल-दिमाग की पूरी सफाई कर आते हैं। खुद से चल, इस बेखुदी को मिटाते हैं। चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं। किसी अनजान शक्स को दोस्त बना आते हैं। पुराने दोस्तों के शिकवे मिटाते हैं। माँ-बाप से मिल, फिर आशीर्वाद पाते हैं। अपनों को, अपने ही लिये, थोड़ा सा मानते हैं। चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं। वन-वास गयी, मासूमियत को घर ले आते हैं। अहम्, द्वेष, ईर्ष्या के पटाखे जलाते हैं। दिल में अच्छाई के दिए जलाते हैं। सब कुछ भूल के इस बार, दिल वाली दिवाली मानते हैं। .....Happy Diwali....

मिट्टी वाले दीये जलाना...अबकी बार दीवाली में...

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राष्ट्रहित का गला घोंटकर,               छेद न करना थाली में... मिट्टी वाले दीये जलाना...            अबकी बार दीवाली में... देश के धन को देश में रखना,               नहीं बहाना नाली में.. मिट्टी वाले दीये जलाना...           अबकी बार दीवाली में... बने जो अपनी मिट्टी से,             वो दिये बिकें बाज़ारों में... छुपी है वैज्ञानिकता अपने,                सभी तीज़-त्यौहारों में... चायनिज़ झालर से आकर्षित,                  कीट-पतंगे आते हैं... जबकि दीये में जलकर,            बरसाती कीड़े मर जाते है...

बचपन बाली दिवाली... Very Beautiful Lines by Gulzar...

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बचपन बाली दिवाली .... Bachpan Wali Diwali.... हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं।  चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस  पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं  .... दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं चवन्नी -अठन्नी  पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर  बल्ब भी  लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी  खाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं बार-बार बस गिनते जाते है चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं प्रसाद की  थाली ...

जानिये करवा चौथ मनाने के पीछे का कारण, महत्त्व एवं कथा...

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जानिये करवा चौथ मनाने के पीछे का कारण, महत्त्व एवं कथा... करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब ४ बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है...

क्या है करवा चौथ की प्राचीन कथा एवं व्रत की विधि, जानिए...

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क्या है करवा चौथ की प्राचीन कथा एवं व्रत की विधि, जानिए... व्रत की विधि सुबह स्नान कर अपने पति की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य व अखंड सौभाग्य के लिए संकल्प लें। बिना कुछ खाए-पिए रहें। शाम को पूजन स्थान पर एक साफ लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान

दोस्तो दिल थाम कर पढना बहुत ही नायाब पेश कश की है देश के जवानो के नाम...

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दोस्तो दिल थाम कर पढना बहुत ही नायाब पेश कश की है देश के जवानो के नाम... आ जाओ मेरे सिपाही..... दीवाली का वादा था, अब होली पर तो आ जाना, तुम बिन क्या तीज त्योहार,बस बच्चों को है बहलाना । नही लगता है मन कहीं भी, थम गये हैं मेरे रात दिन, रुक गया है जैसे जीना, बस है साँसो का ताना बाना । थरथराते हैं मेरे हाँथ सजन,  जब छूती हूँ भेजे रुपये, खर्चने को मन करता नही, चूल्हा भी नही चाहती बुझाना। सहलाती रहती हूँ वो साड़ी, जो लाये थे पिछले सावन, पहनूंगी जब तुम आओगे, अभी तो ठीक है वही पुराना । कटती नही है मुझसे प्रियतम, ये लंबी लंबी राते , होते जो पास तो सो जाती,  लेकर बाँहों का सिरहाना । देकर मुट्ठी भर चाँदनी, भर गये अमावस आँचल में, बैरागन सी फिरती हूँ,  बस काम ख़तों को है दोहराना । बैठी हूँ राह देखती मैं ,आ जाओ मेरे सिपाही तुम, लहराते आना तिरंगा हाय, न इसमे लिपटकर आ जाना, मातृभूमि की रक्षा मे, दिया है मैने सब सुख अपना, पर कसम तुम्हे भवानी माँ, सिंदूर मेरा हर हाल बचाना।

रावण जब रणभूमि में मृत्युशय्या पर अंतिम सांसे ले रहा था तब उसने श्री राम से कहा...

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रावण जब रणभूमि में मृत्युशय्या पर अंतिम सांसे ले रहा था तब उसने श्री राम से कहा- "राम मैं तुमसे हर बात में श्रेष्ठ हूँ। जाति मेरी ब्राह्मण हैं, जो तुमसे श्रेष्ठ है। आयु में भी तुमसे बड़ा हूँ। मेरा कुटुम्ब तुम्हारे कुटुम्ब से बड़ा है।

दशहरा (विजयदशमी,आयुध-पूजा) विशेष...

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दशहरा  (विजयदशमी,आयुध-पूजा) विशेष... अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरे के नाम से मनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा...

#पद्य: सिंह की सवार बनकर रंगों की फुहार बनकर... तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ...

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तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आ ओ..... सिंह की सवार बनकर रंगों की फुहार बनकर पुष्पों की बहार बनकर सुहागन का श्रृंगार बनकर तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ...

वह देश है अपना भारत महान... बहुत ही सुन्दर कविता...!!!

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वह देश है अपना भारत  महान... जहां सहज सरल जीवन है अपना जहां सुंदर मधुर रिश्तों में है अपनापन जहां जन्म लेकर भाग्य को भी हो गर्व जहां उल्लास और उन्नति के हो कई पर्व

गणेशजी से सम्बंधित पौराणिक कथाओं का कुछ अंश...। Must Read...

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गणेशजी की पौराणिक कथा... भगवान गणेश के संबंध में यूँ तो कई कथाएँ प्रचलित है किंतु उनके गजानन गणेश कहलाने और सर्वप्रथम पूज्य होने के संबंध में जग प्रसिद्ध कथा यहाँ प्रस्तुत है।

रोचक किस्सा: हिन्दू एक संस्कृति है , सभ्यता है... सम्प्रदाय नहीं...!

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एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे! रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा .. मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया ! अकबर ने पूछा कौन हे ये ? बीरबल -- मेरी माता हे ! अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला...

भारतीय संस्कृति: अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने... Indian Culture..

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"अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने !

क्यों...? तुलसी के पौधे को लोग घर के आँगन में लगाते हैं... Why ...? People plant "Basil" in the courtyard of the house...

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नमस्कार ! रीडर्स, इस पोस्ट में हम आपको तुलसी के पौधे को घर के आँगन में लगाये जाने के कारण के बारे में चर्चा करेंगे...

क्यों...? भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं... क्या उस प्रसाद को वे खाते हैं..? Why ...? Offer offerings to God... do they eat that offering...?

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नमस्कार! रीडर्स,             आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे कि क्यों हम भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं, और जो प्रसाद हम भगवान को चढ़ाते हैं क्या उसे वे खाते हैं। और यदि खाते हैं , तो घटता क्यों नहीं...?

क्यों...? पीपल वृक्ष को पवित्र मानकर लोग उसकी करते हैं पूजा...Why ...? People tend to worship the Holy people as the tree ...

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नमस्कार! रीडर्स, आपको इस पोस्ट में हम आपको पीपल वृक्ष की पवित्रता का धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारण के बारे में बताएँगे। हमारे देश में प्राचीन काल से ही पीपल वृक्ष को पवित्र एवं पूज्यनीय मानते हैं।  

क्यों...? हाथ मिलाना उचित नहीं है, क्या भारतीय मान्यता के अनुसार हाथ मिलाना सहीं है...? Why ...? The handshake is not fair, according to Indian recognition handshake is correct ...?

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नमस्कार ! रीडर्स, आप सभी का हमारे इस नए ब्लॉग में स्वागत है। आज इस पोस्ट में हम बात करेंगे कि क्या भारतीय संस्कृति के अनुसार हाथ मिलाना उचित है अथवा नहीं..? इसके साथ-साथ हम इसका वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट करने का प्यास करेंगे।