चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं...

इस दिवाली, चलो दिल से दिल मिलाते हैं।
खोये हुऐ दोस्तों को, फिर ढूंढ़ आते हैं।
सदियों से, रिश्तों पे पड़ी,
धूल की मोटी परतें हटाते हैं...


चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं।
मुरझाये चहेरों पर, रौनक ले आते हैं।
हर और बस, मुस्कुराहटें फैलाते हैं।
दिल-दिमाग की पूरी सफाई कर आते हैं।
खुद से चल, इस बेखुदी को मिटाते हैं।
चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं।


किसी अनजान शक्स को दोस्त बना आते हैं।
पुराने दोस्तों के शिकवे मिटाते हैं।
माँ-बाप से मिल, फिर आशीर्वाद पाते हैं।
अपनों को, अपने ही लिये, थोड़ा सा मानते हैं।
चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं।

वन-वास गयी, मासूमियत को घर ले आते हैं।
अहम्, द्वेष, ईर्ष्या के पटाखे जलाते हैं।
दिल में अच्छाई के दिए जलाते हैं।
सब कुछ भूल के इस बार,
दिल वाली दिवाली मानते हैं।


.....Happy Diwali....

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