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शुक्र है शिक्षक हूँ, कुछ और नही... बहुत ही खूबसूरत रचना...▌Teacher's Day Special

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  Sharing this beautiful piece of writing... "शुक्र है शिक्षक हूँ" नेता नहीं, एक्टर नहीं, रिश्वत खोर नहीं, शुक्र है शिक्षक हूँ , कुछ और नही... न मैं स्पाइसजेट में घूमने वाला गरीब हूँ,

‌वक्त कम‬ है, पूरा जोर‬ लगा दो... ‎कुछ को‬ मैं जगाता हुँ, कुछ‬ को तुम जगा दो...

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‌ वक्त कम‬ है, ‎ पूरा जोर‬ लगा दो .. ‎कुछ को‬ मैं जगाता हुँ, ‎कुछ‬ को तुम जगा दो... निस्वार्थ भाव से "देते रहने की ताकत"

अंतिम यात्रा का बहूत सुंदर वर्णन...|| Beautiful description of the last journey...

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किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है... था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था....

मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा...|| Mile Sur Mera Tumhara...

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मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने ह मारा , सुर की नदियाँ हर दिशा से बहते सागर में मिलें ... बादलों का रूप ले कर बरसे हल्के हल्के

माँ की इच्छा..! रौंगटे खड़े कर देने वाली कविता...| Mother's Will | DevBhartiFun

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रौंगटे खड़े कर देने वाली कवि ता...!!! ____________ माँ की इच्छा ___________ महीने बीत जाते हैं, साल गुजर जाता है, वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर, मैं तेरी राह देखती हूँ।

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है...और तू मेरे गाँव को गवाँर कहता है...| Teri Buraiyon Ko Har Akhbar Kahta Hai...

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ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है...!! #तेरी_बुराइयों को हर #अख़बार कहता है, और तू मेरे #गांव को #गँवार कहता है... #ऐ_शहर मुझे तेरी #औक़ात पता है... तू #चुल्लू_भर_पानी को भी #वाटर_पार्क कहता है... #थक गया है हर #शख़्स काम करते करते... तू इसे #अमीरी का #बाज़ार कहता है।

वाह रे मानव तेरा स्वभाव...विचित्र दुनिया का कठोर सत्य... | Waah re Insaan...

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वाह रे मानव तेरा स्वभाव... ।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ... पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।। यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो...

कितनी गहरी बात लिख दी है किसी ने इस कविता में...! Heart Touching Lines

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कितनी गहरी बात लिख दी है किसी नें... बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में। उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।। सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।

जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हूं... Jindagi Hai Chhoti Har Pal Mein Khus Hun...

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जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है। अरे... "बॉडी" लेकर आइये, "बॉडी" को उठाइये, "बॉडी" को सूलाइये ऐसे शब्दो से आपको पूकारा जाता है, वे लोग भी आपको आपके नाम से नही पुकारते, जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने

शिक्षक हूँ, पर ये मत सोचो, बच्चों को सिखाने बैठा हूँ...!! Sikshak Hun...Kavita

शिक्षक हूँ, पर ये मत सोचो, बच्चों  को  सिखाने  बैठा हूँ मैं   डाक   बनाने  बैठा  हूँ ,   मैं   कहाँ   पढ़ाने   बैठा हूँ कक्षा  में  जाने  से  पहले भोजन  तैयार  कराना है ईंधन क...

Poem: उस रोज़ "दिवाली" होती है...Us Roj Diwali Hoti Hai...

अतिशय सुंदर पंक्तियाँ... 💐💐 जब मन में हो मौज बहारों की चमकाएँ चमक सितारों की, जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों तन्हाई  में  भी  मेले  हों, आनंद की आभा होती है उस रोज़ "दिवाली" होती है ...

चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपावली का त्यौहार अमावस...

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चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपावली का त्यौहार अमावस की रात में मनाया जाता है और क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली मना नहीं सकता। यह एक मधुर कविता है कि चाँद किस प्रकार खुद को राम के हर कार्य से जोड़ लेता है और फिर राम से शिकायत करता है और राम भी उस की बात से सहमत हो कर उसे वरदान दे बैठते हैं आइये देखते हैं । ************************ जब चाँद का धीरज छूट गया । वह रघुनन्दन से रूठ गया । बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है । स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है । तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है । हमारी ही चांदनी में सिया को निहारा है । सीता के रूप को हम ही ने सँभारा है । चाँद के तुल्य उनका मुखड़ा निखारा है । जिस वक़्त याद में सीता की , तुम चुपके - चुपके रोते थे । उस वक़्त तुम्हारे संग में बस , हम ही जागते होते थे । संजीवनी लाऊंगा , लखन को बचाऊंगा ,. हनुमान ने तुम्हे कर तो दिया आश्वश्त मगर अपनी चांदनी बिखरा कर, मार्ग मैंने ही किया था प्रशस्त । तुमने हनुमान को गले से लगाया । मगर हमारा कहीं नाम भी न आया । ...

चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं...

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इस दिवाली, चलो दिल से दिल मिलाते हैं। खोये हुऐ दोस्तों को, फिर ढूंढ़ आते हैं। सदियों से, रिश्तों पे पड़ी, धूल की मोटी परतें हटाते हैं... चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं। मुरझाये चहेरों पर, रौनक ले आते हैं। हर और बस, मुस्कुराहटें फैलाते हैं। दिल-दिमाग की पूरी सफाई कर आते हैं। खुद से चल, इस बेखुदी को मिटाते हैं। चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं। किसी अनजान शक्स को दोस्त बना आते हैं। पुराने दोस्तों के शिकवे मिटाते हैं। माँ-बाप से मिल, फिर आशीर्वाद पाते हैं। अपनों को, अपने ही लिये, थोड़ा सा मानते हैं। चल इस बार, कुछ ऐसी दिवाली मनाते हैं। वन-वास गयी, मासूमियत को घर ले आते हैं। अहम्, द्वेष, ईर्ष्या के पटाखे जलाते हैं। दिल में अच्छाई के दिए जलाते हैं। सब कुछ भूल के इस बार, दिल वाली दिवाली मानते हैं। .....Happy Diwali....

बचपन बाली दिवाली... Very Beautiful Lines by Gulzar...

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बचपन बाली दिवाली .... Bachpan Wali Diwali.... हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं।  चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस  पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं  .... दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं चवन्नी -अठन्नी  पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर  बल्ब भी  लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी  खाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं बार-बार बस गिनते जाते है चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं प्रसाद की  थाली ...

दोस्तो दिल थाम कर पढना बहुत ही नायाब पेश कश की है देश के जवानो के नाम...

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दोस्तो दिल थाम कर पढना बहुत ही नायाब पेश कश की है देश के जवानो के नाम... आ जाओ मेरे सिपाही..... दीवाली का वादा था, अब होली पर तो आ जाना, तुम बिन क्या तीज त्योहार,बस बच्चों को है बहलाना । नही लगता है मन कहीं भी, थम गये हैं मेरे रात दिन, रुक गया है जैसे जीना, बस है साँसो का ताना बाना । थरथराते हैं मेरे हाँथ सजन,  जब छूती हूँ भेजे रुपये, खर्चने को मन करता नही, चूल्हा भी नही चाहती बुझाना। सहलाती रहती हूँ वो साड़ी, जो लाये थे पिछले सावन, पहनूंगी जब तुम आओगे, अभी तो ठीक है वही पुराना । कटती नही है मुझसे प्रियतम, ये लंबी लंबी राते , होते जो पास तो सो जाती,  लेकर बाँहों का सिरहाना । देकर मुट्ठी भर चाँदनी, भर गये अमावस आँचल में, बैरागन सी फिरती हूँ,  बस काम ख़तों को है दोहराना । बैठी हूँ राह देखती मैं ,आ जाओ मेरे सिपाही तुम, लहराते आना तिरंगा हाय, न इसमे लिपटकर आ जाना, मातृभूमि की रक्षा मे, दिया है मैने सब सुख अपना, पर कसम तुम्हे भवानी माँ, सिंदूर मेरा हर हाल बचाना।

#पद्य: सिंह की सवार बनकर रंगों की फुहार बनकर... तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ...

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तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आ ओ..... सिंह की सवार बनकर रंगों की फुहार बनकर पुष्पों की बहार बनकर सुहागन का श्रृंगार बनकर तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ...

#कविता: चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में... मैथिलीशरण गुप्त

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चारु चंद्र की चंचल किरणें... चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में। पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से, मानों झीम रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से॥

#कविता: खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी... सुभद्रा कुमारी चौहान

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खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी... सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

#कविता: मेरा नया बचपन.... सुभद्रा कुमारी चौहान

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मेरा नया बचप न... बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद?

कवी राहत इंदौरी जी की कविता: उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो ...

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उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो खर्च करने से पहले कमाया करो ...