आज़ का सुविचार: साथ रह कर जो छल करें, उससे बड़ा कोई... Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - September 11, 2017 ।। आज़ का सुविचार ।। साथ रह कर जो छल करें, उससे बड़ा कोई " शत्रु " नहीं हो सक्ता ... और, हमारे मुंह पर हमारी बुराइयां बता दे, उससे बड़ा कोई " कल्याण-मित्र " हो नहीं सकता । याद रहें, साफ-साफ बोलनेवाला " कड़वा " जरुर होता है, पर, " धोखेबाज़ " हर्गिज़ नहीं । Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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