आज़ का सुविचार: साथ रह कर जो छल करें, उससे बड़ा कोई...

।। आज़ का सुविचार ।।

साथ रह कर जो छल करें, उससे बड़ा कोई " शत्रु " नहीं हो सक्ता ...
और,
हमारे मुंह पर हमारी बुराइयां बता दे,
उससे बड़ा कोई " कल्याण-मित्र " हो नहीं सकता ।
याद रहें,
साफ-साफ बोलनेवाला " कड़वा " जरुर होता है, पर, " धोखेबाज़ " हर्गिज़ नहीं ।

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